Thursday, July 18, 2013

मिस्ड कॉल

उत्ताराखंड की त्रासदी को अब तक कोई भुला ना पाया है ...  जिन्हे छोड़ कर गये थे अपने , उनका अब तक कोई अता - पता नही ...  खुदा का कहर था जो अलकनंदा की लहरों मे पता नही कितनी ज़िंदगियाँ अतीत मे खो गयी ... शोक संतप्त परिवारों को कौन दिलासा देगा ... पानी से ख़ौफ़ पैदा हो गया है, पर आँखों में आँसू थमते नही है ... सैलाब रुकता नही जब अपने कहीं खो जाते है - वापसी की टिकिट जेब मे हो पर वापसी  के मुसाफिर का ही पता नही .. अफ़सोस ... नमन उन श्रधालुओं को  जो गये थे उम्मीदों से पर घर ना लौटे ....


....... मिस्ड कॉल .....
 

भगवान के दर्शन की तमन्ना थी
वे चल पड़े लेकर मां को साथ 
सब कुछ लिया था साथ 
स्वेटर , स्कार्फ , गरम मोजे 
तीन जोड़ी कपड़े , एक टोपी,
मां की दवाइयाँ , कमर का पट्टा,
मोबाइल , चारजर, टॉर्च, माचिस
क्रेडिट कार्ड, पोलिथीन में पैसे,
गंगा जल के लिए बोतल,
सब कुछ ले लिया था साथ ...
..
जाने का रिज़र्वेशन तारीख तय थी,
वापसी की टिकेट अलग से रख ली,
बचपन मे कभी गये थे बद्री केदार,
अब मां संग पाना था पुण्य,
रोज दो - तीन बार बात होती,
खाने पीने की सलाह होती,
केदार के दर्शन हो गये ,
अब बद्री की तरफ निगाह गयी
दूर पर्वतों पर बर्फ ही बर्फ थी
मां थोड़ी विचलित सर्द थी ....
..
पापा बोले " मैं हूँ ना ..."
हमे मोबाइल पर खबर दी 
मिस्ड कॉल ही था वो
... सभी लाइन व्यस्त है 
आप कतार में है,
कृपया प्रतीक्षा करे ....
बस मां - बाबूजी आप -
मोबाइल की तरंगों मे या 
अलकनंदा की तरंगों मे ,
मिस्ड " कॉल " था वो 
..
कहाँ रह गये 
बस आँखों के पानीमें 
बोझिल हो गये
सब कुछ ले लिया था साथ ...
और पंद्रह तारीख भी
आ गयी ...
पापा - मां -
अब कब आओगे ?
हम कहाँ खोजे आपको
वो मिस्ड " काल" कहाँ ढूँढे ?
......
                                                       - कर्नल ( सेवा निवृत्त) सारंग थत्ते

1 comment:

  1. वो मिस्ड " काल" कहाँ ढूँढे ?

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