04 July 2013
वापसी की तारीख -
पता नही कहाँ तक,
चले गये वो अभागे,
पानी का ऐसा आक्रोश,
उनके जज़्बे को डुबो गया ...
..
अब तक ना आए,
अब कब आओगे,
कहाँ खोजे आपको ?
कोई निशान ही नही ...
..
अकेला सफ़र अब शुरू,
अर्थ हीन दिशा हीन बरबस,
आपके बिना ज़िंदगी का गुरूर,
झेलना होगा इस त्रासदी को ...
..
आपने भी तो आत्मसात किया,
उस बहती धारा के रौद्र रूप को,
कैसा रहा होगा वो सैलाब,
मां बाबूजी हम कुछ ना कर पाए ...
..
कहाँ खोजे आपको,
इस १५ जुलाई तक ?
अब बस उपर ही मिलेंगे ,
हम तो यहाँ अनाथ हो गये है ....
( सरकारी सूचना : त्रासदी में गुम व्यक्तियों को 15 जुलाई के बाद मृत मान लिया जाएगा ) ..... सब्र - आक्रोश - अफ़सोस से दो - दो हाथ ... हमारी संवेदना बस शब्दों में ~
04 July 2013
वापसी की तारीख -
पता नही कहाँ तक,
चले गये वो अभागे,
पानी का ऐसा आक्रोश,
उनके जज़्बे को डुबो गया ...
..
अब तक ना आए,
अब कब आओगे,
कहाँ खोजे आपको ?
कोई निशान ही नही ...
..
अकेला सफ़र अब शुरू,
अर्थ हीन दिशा हीन बरबस,
आपके बिना ज़िंदगी का गुरूर,
झेलना होगा इस त्रासदी को ...
..
आपने भी तो आत्मसात किया,
उस बहती धारा के रौद्र रूप को,
कैसा रहा होगा वो सैलाब,
मां बाबूजी हम कुछ ना कर पाए ...
..
कहाँ खोजे आपको,
इस १५ जुलाई तक ?
अब बस उपर ही मिलेंगे ,
हम तो यहाँ अनाथ हो गये है ....
( सरकारी सूचना : त्रासदी में गुम व्यक्तियों को 15 जुलाई के बाद मृत मान लिया जाएगा ) ..... सब्र - आक्रोश - अफ़सोस से दो - दो हाथ ... हमारी संवेदना बस शब्दों में ~
पता नही कहाँ तक,
चले गये वो अभागे,
पानी का ऐसा आक्रोश,
उनके जज़्बे को डुबो गया ...
..
अब तक ना आए,
अब कब आओगे,
कहाँ खोजे आपको ?
कोई निशान ही नही ...
..
अकेला सफ़र अब शुरू,
अर्थ हीन दिशा हीन बरबस,
आपके बिना ज़िंदगी का गुरूर,
झेलना होगा इस त्रासदी को ...
..
आपने भी तो आत्मसात किया,
उस बहती धारा के रौद्र रूप को,
कैसा रहा होगा वो सैलाब,
मां बाबूजी हम कुछ ना कर पाए ...
..
कहाँ खोजे आपको,
इस १५ जुलाई तक ?
अब बस उपर ही मिलेंगे ,
हम तो यहाँ अनाथ हो गये है ....
( सरकारी सूचना : त्रासदी में गुम व्यक्तियों को 15 जुलाई के बाद मृत मान लिया जाएगा ) ..... सब्र - आक्रोश - अफ़सोस से दो - दो हाथ ... हमारी संवेदना बस शब्दों में ~


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