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ज़िंदा दफ़नाया तुम्हे,
हमें दुख बहुत हुआ,
क्या करते हम,
उपर से हुकुम था,
163 साल के हो गये,
एक दिन तो जाना ही था,
हम याद रखेंगे तुम्हे...
..
तुम्हारी सीधे शब्दो की बाते,
गुलाबी मजमून,
बस दो मोड़ होते,
मिलते ही साँसे थम जाती,
पता नही कैसे है,
तुम बोलते कम - लिखते अपर केस में,
हम याद रखेंगे तुम्हे...
..
जन्म - मृत्यु पास - फेल शादी - बर्बादी,
सबका हाल तुमने ही दिया,
हमने घर बैठे बस साइन किया,
ये तब था जब ये काले - गोरे,
बड़े - छोटे भाई एस एम एस नही थे,
हम याद रखेंगे तुम्हे....
..
बस तुम ही जो जल्द आ जाते थे,
साइकल पर दशहरा - दीवाली पर,
होली और ईद पर कुछ ले जाते,
हम खुशी - खुशी दे देते तुम्हे,
अलबिदा कैसे लिखू ,
कोई संख्या नही कोड की,
हम याद रखेंगे तुम्हे....
..
कहाँ खोजेंगे हम तुम्हे,
बहुत प्यारे थे हमारी ज़िंदगी में,
देखे हमने वो तुम्हारे मजमून,
जिसे हिन्दी में " तार ",
अँग्रेज़ी में " टेलीग्राम " कहते,
मगर आते लिफाफे में बंद,
हम याद रखेंगे तुम्हे ...
अलविदा . - .. - ...
डा ... डिट ... डा ...

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